हौसले की ऊंचाई: अरुणिमा सिन्हा की वो कहानी जिसने दुनिया को हिला दिया"
सपनों की उड़ान: एक झुग्गी में रहने वाले लड़के की कहानी, जिसने खुद को कभी हारने नहीं दिया : "हौसले की ऊंचाई: अरुणिमा सिन्हा की वो कहानी जिसने दुनिया को हिला दिया" प्रस्तावना : जब ज़िन्दगी अंधेरे में डूब जाती है, तब एक चिंगारी ही उम्मीद की रौशनी बन जाती है। ऐसी ही रौशनी बनीं अरुणिमा सिन्हा — एक ऐसा नाम जिसने विकलांगता को अपनी ताकत बना दिया और माउंट एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा लहराया। यह कहानी है एक लड़की की जो ट्रेन से फेंकी गई, लेकिन कभी उम्मीद से नहीं गिरी। शुरुआती ज़िंदगी: अरुणिमा सिन्हा का जन्म उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर में हुआ। वो एक राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल खिलाड़ी थीं। देश के लिए खेलने का सपना लेकर चल रही थीं, लेकिन 2011 में एक हादसे ने उनकी दुनिया बदल दी। हादसा : 11 अप्रैल 2011 को जब अरुणिमा एक ट्रेन से दिल्ली जा रही थीं, कुछ लुटेरों ने उनका चैन खींचने की कोशिश की। विरोध करने पर उन्हें चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया गया। दूसरी पटरी पर गिरने से उनके ऊपर से एक ट्रेन गुजर गई और उनका एक पैर काटना पड़ा। समाज का रवैया: अस्पताल में भर्ती अरुणिमा को दर्द सिर्फ शरीर म...