कहानी का नाम: "मां की चप्पल और बड़े सपने"
कहानी का नाम: "मां की चप्पल और बड़े सपने" गांव के एक छोटे से घर में रहने वाला अर्जुन बचपन से ही सपने देखने वाला लड़का था। उसका सपना था कि वो एक दिन अपनी मां को वो सारी खुशियाँ देगा, जो उन्होंने कभी सोची भी नहीं थीं। लेकिन गरीबी, ताने, और हालात उसके रास्ते की दीवार बनते जा रहे थे। उसकी मां हर दिन खेतों में काम करती थीं। उनके पैरों में फटी हुई चप्पलें थीं, लेकिन उन्होंने कभी शिकायत नहीं की। जब भी अर्जुन अपनी मां से कहता, "मां, एक दिन मैं आपको हीरो बना दूंगा," तो मां मुस्कुरा देती थीं और कहतीं, "मुझे बस तेरा मेहनत करता चेहरा देखना है।" स्कूल के दिनों में अर्जुन को अक्सर तंग किया जाता था। "ये तो मजदूर का बेटा है," लोग कहते। लेकिन अर्जुन जानता था कि उसका संघर्ष ही उसकी असली ताकत है। रात को जब सब सोते, वो पुरानी किताबें पढ़ता और इंटरनेट कैफे जाकर नई चीजें सीखता। ट्विस्ट तब आया जब अर्जुन ने एक ऑनलाइन ब्लॉग शुरू किया। उसने अपनी मां की कहानी, गांव की ज़िन्दगी और संघर्ष को शब्दों में ढाला। "एक मां की फटी चप्पल और उसका बेटा" — ये टाइटल...